गोल्फ़ का पैसा, ‘खेल-शुल्क’ और ‘सफ़र-खर्च’ अलग करें

गोल्फ़ का बिल इसलिए उलझा लगता है कि अलग-अलग तरह का पैसा मिल जाता है। खेल-शुल्क और खाना-पीना अक्सर काउंटर पर हर कोई खुद देता है। वहीं कारपूल का टोल और पेट्रोल बाद में सवारों में बाँटा जाता है। इन दोनों को शुरू से अलग सोचें, तो उस दिन का निपटान बहुत आसान हो जाता है।

काउंटर का भुगतान वहीं हर कोई खुद कर ले, यही सबसे सरल है। बाँटने की असली ज़रूरत तब आती है जब किसी ने सफ़र-खर्च एकमुश्त अग्रिम दे दिया हो। इसलिए यह लेख कारपूल के सफ़र-खर्च और, जिस दिन किसी ने एकमुश्त दिया हो, उसके निपटान पर टिका है।

कारपूल का टोल और पेट्रोल निकालें

पहले कारपूल में लगा पैसा जोड़ें। मान लें चार लोग एक गाड़ी में गए, टोल आने-जाने का ₹1,800 और पेट्रोल ₹1,200 हुआ, तो सफ़र-खर्च कुल ₹3,000। इसे सवारों में बाँटना ही आधार है।

चार लोगों के कारपूल का सफ़र-खर्च, उदाहरण
मदरकम
टोल (आना-जाना)₹1,800
पेट्रोल₹1,200
सफ़र-खर्च कुल₹3,000

सीधे चार में बाँटें तो प्रति व्यक्ति ₹750, पर गाड़ी निकालकर चलाने वाले से भी उतना ही लेना ज़रा अखरता है। यहाँ गाड़ी चलाने वाले का ध्यान रखें।

गाड़ी चलाने वाले को, कम

गाड़ी निकालने वाले का बोझ सिर्फ़ पेट्रोल नहीं। पूरे दिन चलाने में ध्यान बँधा रहता है और आने-जाने का समय भी लगता है। इसलिए गाड़ी चलाने वाले को कम रखना बिलकुल स्वाभाविक शुक्रिया है। Suguwari में ‘गाड़ी चलाने वाला कम’ वाला झुकाव है, जो इस मौके पर जस का तस बैठता है।

सबसे सरल है गाड़ी चलाने वाले का सफ़र-खर्च मुफ़्त कर देना। ₹3,000 का सफ़र-खर्च बाकी तीन सवारों में बाँटें, तो प्रति व्यक्ति ठीक ₹1,000; गाड़ी चलाने वाला ₹0। थोड़ा-सा ही हल्का करना हो, तो चार में बाँटे ₹750 से बस चलाने वाले का घटाकर वह हिस्सा सवारों में रख सकते हैं। दोनों, वास्तविक रकम देखते हुए तय होते हैं।

सफ़र-खर्च ₹3,000, गाड़ी चलाने वाला मुफ़्त
समूहसफ़र-खर्च का हिस्सा
गाड़ी चलाने वाला₹0
साथ के तीन सवारप्रति व्यक्ति ₹1,000

जस का तस काम आने वाला, शुक्रिया का वाक्य
‘चलाने के लिए शुक्रिया। सफ़र-खर्च हम तीनों जो बैठे थे, वही उठा लेंगे, तुम बिलकुल मत सोचो।’

खेल के बाद का निपटान, एक जगह लाएँ

काउंटर पर हर कोई अपना दे चुका हो, तो बस सफ़र-खर्च का निपटान बचता है। गाड़ी चलाने वाले ने टोल और पेट्रोल दोनों अग्रिम दिए हों, तो सवार उसे ₹1,000-₹1,000 दे दें, बात ख़त्म। नकद हो या भुगतान ऐप, कोई भी। भेजने का पता एक ही व्यक्ति (गाड़ी चलाने वाले) पर आता है, इसलिए पुष्टि भी आसान।

अगर किसी दिन किसी ने खेल-शुल्क या खाना-पीना भी एकमुश्त अग्रिम दिया हो, तो सफ़र-खर्च के साथ एक ही निपटान में लाएँ। Suguwari में हर भुगतान पर ‘किसने दिया’ और ‘किसका हिस्सा’ डाल दें, तो खेल-शुल्क, खाना-पीना और सफ़र-खर्च मिलाकर, कौन किसे कितना दे, एक बार में निकलता है। भेजने की संख्या भी अधिकतम ‘लोगों की संख्या − 1’ तक सिमटती है। लोग बढ़ें, फिर भी 20 तक इसी तरह पकड़ में रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोल्फ़ का बिल, आधार पर कैसे बाँटें?

खेल-शुल्क और खाना-पीना काउंटर पर हर कोई खुद दे, और कारपूल का टोल-पेट्रोल केवल सवारों में बाँटें, यही आधार है। अलग-अलग तरह के पैसे को अलग सोचें, तो उस दिन का निपटान साफ़ रहता है।

गाड़ी चलाने वाले का सफ़र-खर्च कैसे रखें?

कम रखना स्वाभाविक है। सबसे सरल है उसका सफ़र-खर्च मुफ़्त करना, ₹3,000 सफ़र-खर्च हो तो साथ के तीन सवार ₹1,000-₹1,000 और गाड़ी चलाने वाला ₹0। थोड़ा ही हल्का करना हो, तो भी वास्तविक रकम देखते हुए तय कर सकते हैं।

टोल और पेट्रोल कैसे जोड़ें?

आने-जाने का टोल और पेट्रोल जोड़कर सवारों में बाँटें। उदाहरण में टोल ₹1,800 और पेट्रोल ₹1,200, कुल ₹3,000। गाड़ी चलाने वाले को मुफ़्त कर साथ के तीन में बाँटें, तो प्रति व्यक्ति ठीक ₹1,000।